"BLOCKCHAIN MINING का इतिहास की पूरी जानकारी हिंदी में" 

ब्लॉकचेन माइनिंग का आरंभ 2009 में बिटकॉइन नेटवर्क के साथ हुआ, जब सतोशी नकामोटो नामक व्यक्ति ने इसे पहली बार प्रस्तुत किया।

माइनिंग का काम नए ब्लॉक तैयार करना है, जिसमें सभी नेटवर्क लेन-देन की जानकारी शामिल होती है। 

पहले में, बिटकॉइन माइनिंग को Ginning verification process कहा जाता था, जिसमें कंप्यूटरों को मशीन सिक्का बनाने के लिए एक समस्या को हल करने के लिए प्रेरित किया जाता था।

2010 में, GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) का प्रयोग किया गया जिससे लोग माइनिंग को अधिक Advance बना सकते थे। 

2013 में, ASIC (Application-Specific Integrated Circuit) माइनर्स का प्रयोग शुरू हुआ, जो इस प्रक्रिया को और तेज़ बना दिया।

बिटकॉइन के अलावा, अन्य क्रिप्टोकरेंसीज़ के लिए भी माइनिंग प्रक्रिया होती है, जैसे कि Ethereum, Litecoin, और Ripple।

माइनिंग के लिए इनसेंटिव के रूप में माइनर्स को नए ब्लॉक को सक्रिय रूप से तैयार करने के लिए बेलन (बिटकॉइन में) या अन्य बदले मिलते हैं। 

हाल के समय में, प्रगति और बढ़ती माइनिंग कुशलता के कारण, माइनिंग में जुटने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है।